पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- नई दिल्ली में आयोजित भारत–यूनाइटेड किंगडम रक्षा परामर्श समूह (DCG) की 25वीं बैठक के दौरान भारत और यूनाइटेड किंगडम ने रक्षा-औद्योगिक सहयोग, सैन्य आदान-प्रदान तथा समुद्री सुरक्षा साझेदारी की समीक्षा की।
भारत–यूनाइटेड किंगडम रक्षा सहयोग में प्रमुख घटनाक्रम
- रक्षा-औद्योगिक सहयोग: भारत और यूनाइटेड किंगडम ने भारत–यूनाइटेड किंगडम विज़न 2035 तथा 10-वर्षीय रक्षा औद्योगिक रोडमैप के अंतर्गत विशेष रूप से अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर ध्यान केंद्रित करते हुए जारी रक्षा-औद्योगिक सहयोग की समीक्षा की।
- दोनों देश क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए भारत की हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) के अंतर्गत क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र (RMSCE) की स्थापना हेतु सहयोग कर रहे हैं।
- सैन्य सहयोग: संयुक्त सैन्य अभ्यासों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा क्षमता निर्माण पहलों के माध्यम से दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ाने पर सहमति बनी।
भारत–यूनाइटेड किंगडम संबंधों का संक्षिप्त विवरण
- भारत–यूनाइटेड किंगडम व्यापक सामरिक साझेदारी: वर्ष 2021 में इसे व्यापक सामरिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया, जिसके अंतर्गत व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य तथा अन्य क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए 10-वर्षीय रोडमैप निर्धारित किया गया है।
- भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच 2+2 संवाद की व्यवस्था है, जिसमें दोनों देशों के विदेश/बाह्य मामलों तथा रक्षा मंत्री शामिल होते हैं।
- व्यापार संबंध: भारत, यूनाइटेड किंगडम का 11वाँ सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जबकि यूनाइटेड किंगडम भारत का 14वाँ सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
- वर्ष 2025 की चौथी तिमाही के अंत तक के चार तिमाहियों में भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं सहित द्विपक्षीय व्यापार £47.9 बिलियन रहा, जो वर्ष 2024 की समान अवधि की तुलना में वर्तमान कीमतों पर 10.0% अथवा £4.3 बिलियन की वृद्धि है।
- भारत–यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA): 15 जुलाई 2026 को लागू हुआ यह समझौता भारत के यूनाइटेड किंगडम को किए जाने वाले 99% निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुँच प्रदान करता है, जबकि यूनाइटेड किंगडम के भारत को किए जाने वाले 91% निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुँच प्रदान करता है, जो व्यापार के लगभग 100% मूल्य को कवर करता है।
- इसमें श्रम-प्रधान क्षेत्र जैसे वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण तथा खिलौने, साथ ही इंजीनियरिंग वस्तुओं, रसायन तथा ऑटोमोबाइल कल-पुर्जों जैसे उच्च-विकास वाले क्षेत्र शामिल हैं।
- रक्षा एवं सुरक्षा: विगत दशक में भारत के रक्षा आयात में यूनाइटेड किंगडम की हिस्सेदारी केवल 3% रही है।
- भारत का उद्देश्य रूसी रक्षा आयात पर अपनी निर्भरता में विविधता लाना तथा स्वदेशी रक्षा उद्योगों का विकास करना है।
- यूनाइटेड किंगडम प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा उन्नत रक्षा क्षमताओं के विकास में भारत की सहायता कर सकता है।
- ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (OGEL) (2022): यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र के किसी देश के लिए यूनाइटेड किंगडम का इस प्रकार का पहला लाइसेंस था, जिसने भारत को सैन्य प्रौद्योगिकी के निर्यात को सुगम बनाया।

- संयुक्त सैन्य अभ्यास: अभ्यास अजेय वारियर, अभ्यास कोंकण तथा अभ्यास कोबरा वारियर।
- बहुपक्षीय सहयोग:
- हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA): भारत सदस्य है, जबकि यूनाइटेड किंगडम संवाद साझेदार है।
- हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (IONS): भारत और यूनाइटेड किंगडम दोनों इसके सदस्य हैं।
- हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI): भारत और यूनाइटेड किंगडम समुद्री सुरक्षा स्तंभ के सह-प्रमुख हैं।
- यूनाइटेड किंगडम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन करता है।
- भारत और यूनाइटेड किंगडम G20 के अंतर्गत वैश्विक व्यापार, आर्थिक स्थिरता तथा जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर सहयोग करते हैं।
- जन-से-जन संबंध: भारतीय मूल के राजनेताओं की संख्या और प्रभाव में वृद्धि हुई है।
- भारतीय प्रवासी समुदाय को एक “मॉडल माइनॉरिटी” के रूप में देखा जाता है, जो विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करता है।
- ब्रिटिश-भारतीय समुदाय: यूनाइटेड किंगडम में भारतीय मूल के लोगों की संख्या 16 लाख से अधिक है, जो यूनाइटेड किंगडम की कुल आबादी का लगभग 2.5% है।
मुद्दे एवं चिंताएँ
- संप्रभुता एवं भारत-विरोधी गतिविधियाँ: भारत को यूनाइटेड किंगडम में खालिस्तान समर्थक उग्रवादी गतिविधियों तथा कट्टरपंथी नेटवर्क को लेकर लगातार सुरक्षा संबंधी चिंताएँ हैं। भारत की ओर से अधिक प्रभावी कूटनीतिक एवं कानून प्रवर्तन संबंधी कार्रवाई की माँग की जाती रही है।
- प्रत्यर्पण में विलंब: भारतीय अधिकारियों द्वारा वांछित आर्थिक अपराधियों और भगोड़ों के यूनाइटेड किंगडम को प्रत्यर्पण में बढ़ती कानूनी देरी एक प्रमुख चिंता है।
- आवागमन को लेकर घरेलू राजनीतिक मतभेद: सामाजिक सुरक्षा छूट (NICs) तथा अस्थायी भारतीय कामगारों के लिए व्यापक आव्रजन कोटा जैसे मुद्दों पर यूनाइटेड किंगडम में राजनीतिक परिचर्चा जारी है।
- भूराजनीतिक मतभेद: पूर्वी यूरोप में जारी संघर्षों तथा कुछ क्षेत्रीय प्रतिबंध व्यवस्थाओं को लेकर दोनों देशों के रणनीतिक दृष्टिकोण में अंतर है, जिसके लिए सावधानीपूर्वक कूटनीतिक संतुलन की आवश्यकता है।
आगे की राह
- भारत–यूनाइटेड किंगडम संबंध ऐतिहासिक रूप से जुड़े संबंधों से आगे बढ़कर अधिक सुदृढ़ आर्थिक, तकनीकी एवं सामरिक साझेदारी की दिशा में अग्रसर हैं।
- भारत और यूनाइटेड किंगडम को पारंपरिक खरीदार–विक्रेता व्यवस्था की अपेक्षा संयुक्त अनुसंधान एवं विकास (R&D), सह-विकास तथा सह-उत्पादन को प्राथमिकता देनी चाहिए।
- द्विपक्षीय सहयोग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियाँ, ड्रोन, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तथा उन्नत प्रणोदन प्रणालियों जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
- दोनों देशों को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री क्षेत्र जागरूकता , सूचना साझाकरण तथा क्षमता निर्माण को और सुदृढ़ करना चाहिए।
स्रोत: TH
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